एक जाँबाज सिपाही जिसने इतिहास बदल दिया
यह कहानी एक ऐसे जांबाज सिपाही की है जिसने मामूली लाठी से एके 47 का सामना किया जिसने अपनी छाती पर गोलियां खाकर भी पाकिस्तान की उस घिनौनी साजिश को दुनिया के सामने नंगा कर दिया
पाकिस्तान की ‘हिंदू आतंकवाद’ की झूठी साज़िश का पर्दाफाश
जिसमें वह हिंदू आतंकवाद का झूठा नाटक कर सारी दुनिया को गुमराह करने की फिराक में थे जिसने मौत की आंखों में आंखें डालकर अजबल कसाब को जिंदा पकड़ा और लश्कर तैबा से लेकर आईएसआई के सारे काले चिट्ठे दुनिया के सामने खोल दिए यह कहानी उस वीर की है जिसने मौत को अपने सीने पर सवार लिया मगर देश की इज्जत पर एक खरोच नहीं आने दी यह कहानी उस वीर की है जिसके शहादत के चलते अमेरिका ने खुद माना कि 261 हमला पाकिस्तान ने किया था संयुक्त राष्ट्र ने लश्कर और जमात दावा पर जिसके बाद बैन लगाया हाफिज सईद को ग्लोबल टेरेस किया यह कहानी उस शेर की है जिसने 42 गोलियां खाकर कलावा पहने आतंकवादी को जिंदा पकड़ा और पाकिस्तान को दुनिया के सामने उसके झूठ के साथ नंगा कर दिया यह कहानी है वीर तुकाराम गोपाल ओमले की जिसकी एक कुर्बानी ने ना सिर्फ मुंबई बल्कि पूरे हिंदुस्तान की आन मान शान को बचा लिया और इसीलिए तुकाराम आज एक ऐसा नाम है जो आईएसआई की नींद उड़ा देता है एक ऐसा नाम है जो कराची से लेकर इस्लामाबाद तक आतंकी सरगनाओं को कपकपा देता है एक ऐसा नाम जो सुनकर हाफिज सईद की रूह कांप जाती है लश्कर तबा के सरगना सहम जाते हैं यह कहानी तुकाराम जी की है 2611 पर उस वीरता की है जहां पर लाठी से सर्वोच्च बलिदान दिया गया और कसाब को पकड़ कर पाकिस्तान को दुनिया के सामने एक्सपोज कर दिया गया इस कहानी की शुरुआत करें उससे पहले हमारी आपसे गुजारिश है कि ऐसे लोगों की कहानियों को आप सुनिए समझिए शेयर कीजिए ताकि आने वाली नस्लों को पता रहे कि वो कौन लोग थे जिनकी वजह से आज हम और आप चैन की जिंदगी जी रहे हैं जो हमारे बीच नहीं रहे हैं यह कहानियां लोगों को इंस्पायर करेंगी भविष्य में ऐसे कई और होंगे जो देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने को तैयार होंगे जब भी भारत माता की आन बान शान पर आएगा
26/11 की काली रात और मुंबई पर हमला
26 नवंबर 2008 वो रात जो कोई साधारण रात नहीं थी हिंदुस्तान के इतिहास की सबसे काली रात समंदर की लहरें शांत थी मगर उन लहरों के नीचे से 10 हैवान निकल चुके थे हाथ में रूसी A के 47 कंधे पर गोला बारूद के बैग दिल में हिंदुस्तान को जलाने की आग और दिमाग में कराची के कंट्रोल रूम से आते हुक्म ताजमहल पैलेस की भव्य सीढ़ियां कुछ ही मिनटों में इन आतंकियों ने खून से लाल कर दी ओबराॉय ट्राइडेंट के लिफ्ट में मासूम बच्चों को यह लाश बनाकर गिरा रहे थे छत्रपति शिवाजी टर्मिनल पर एक मां अपने बच्चे को गोद में दबाए चीख रही थी मगर गोलियां उसकी चीख को भी चुप कर रही थी नरिमन हाउस में रबी और उसकी गर्भवती पत्नी को बंधक बनाया गया मुंबई की सड़कें लाशों से पड़ रही थी पूरा हिंदुस्तान स्तब्ध था दुनिया देख रही थी
गिरगाँव चौपाटी पर निर्णायक मुठभेड़
पाकिस्तान अपने टीवी स्टूडियो में बैठकर नॉन स्टेट एक्टर्स का राग अलापने की तैयारी कर रहा था ठीक उसी वक्त गिरगांव चौपाटी पर एक साधारण सा पुलिस नाका लगा था पुरानी लाठी पुरानी वर्दी पुराना वायरलेस वायरलेस पर एक खबर आती है कि दो आतंकवादी सफेद स्कोडा कार में दक्षिण मुंबई से भाग रहे हैं रात के करीब 10:00 बज रहे थे समंदर की ठंडी हवा चल रही थी चौपाटी पर कुछ प्रेमी जोड़े टहल रहे थे कुछ बच्चे आइसक्रीम खा रहे थे तभी दूर से हाई बीम की चकाचौंध दिखाई पड़ी एक सफेद स्कोडा तेज रफ्तार से आ रही थी वाइपर तेज-तेज तल रहा था ताकि पुलिस को शक ना हो पुलिस ने हाथ दिखाया रुक जा मगर ड्राइवर अबू स्माइल ने एक्सलरेटर और दबा दिया पुलिस को समझ में आ गया कि यही वो हैवान है
बैरिकेड्स पर फायरिंग: अबू इस्माइल ढेर, कसाब ने किया मरने का नाटक
बैरिकेड्स लगे गोलियां चली Skoda के टायर फटे कार लड़खड़ा कर रुकी अबू इस्माइल दरवाजा ठोकर मारकर बाहर कूदा और AK-47 तान कर अंधाधुंध गोलियां फायरिंग कर दी जवाबी फायरिंग हुई एक गोली उसके सीने में दूसरी सिर में वहीं ढेर हो गया उसी कार में दूसरा आतंकी अजमल का सांप पड़ा रहा वह मरा होने का नाटक कर रहा था उसका प्लान साफ था कि थोड़ी देर पड़ा रहेगा और फिर उठकर पूरी पुलिस टीम को खत्म करके भाग जाएगा मगर उस रात नियति ने कुछ और लिख रखा था उस रात वहां मौजूद थे असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर तुकाराम गोपाल उमले 48 साल के वो पहले भारतीय सेना में नायक थे 1991 में मुंबई पुलिस में भर्ती हुए थे घर में पत्नी और चार बच्चे सुबह उठते बच्चों को स्कूल छोड़ते चाय पीते और फिर ड्यूटी पर निकल पड़ते उस रात भी वह ड्यूटी पर थे ना बॉडी आर्मर था ना बुलेट प्रूफ जैकेट ना राइफल सिर्फ एक लाठी और सीने में हिंदुस्तान का जज्बा वो कार के पास पहुंचते दरवाजा खोलते हैं
38 सेकंड का बलिदान: कसाब को ज़िंदा पकड़ने की शर्त
कसाब एके-47 को उठाता है और पॉइंट ब्लैंक रेंज से ट्रिगर दबा देता है पहली गोली छाती में दूसरी तीसरी चौथी पूरी मैगजीीन खाली कर दी जब पोस्टमार्टम हुआ तो पता चला कि 42 गोलियां निकली छाती चटक गई थी पेट फट गया था हाथपांव छलनी हो गया था खून के फव्वारे छूट रहे थे डॉक्टरों ने बाद में बताया कि इतनी गोली लगते ही इंसान का शरीर 2 सेकंड में ढेर हो जाता है मगर तुकाराम उमले 2 सेकंड नहीं पूरे 38 सेकंड तक खड़े रहे 38 सेकंड तक कसाब की जलती हुई AK-47 की नाल को दोनों हाथों से ऐसा झगड़ा कि कसाब हिल ना सका गोलियां लगातार लग रही थी मगर उनकी पकड़ ढीली नहीं हुई वो चीखें इसे जिंदा पकड़ो रे भाई जिंदा उनकी वो चीख आज भी गिरगांव चौपाटी की हवा में गूंजती है उन्हीं 38 सेकंड में बाकी पुलिस वाले दौड़ पड़े कसाब को खींच कर बाहर निकाला हाथपांव बांधे जिंदा पकड़ा और तुकाराम उमले वहीं गिर गए उनका सीना लहूलुहान हो गया सांसे थम गई जब शव अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टर्स हैरान थे क्योंकि उनके दोनों हाथ अभी भी मुट्ठी बंधी हुई थी जैसे कसाब की राइफल थामी है अगर वो एक पल को पीछे हट जाते अगर वो डर जाते तो कसाब पूरी टीम को खत्म करके भाग निकलता फिर पाकिस्तान और उसके पाले हुए गैंग की मौज हो जाती वो दुनिया भर में कहते कि यह हिंदू आतंकवाद था
बलिदान का वैश्विक परिणाम और भारत की जीत
भारत ने ड्रामा रचा ताज ओबराय सीएसटी नरीमन हाउस सबको हिंदू साजिश का नाम दे देते संयुक्त राष्ट्र भारत को घेरते अमेरिका भी शक की निगाहों से देखता लेकिन तुकाराम साहब ने यह होने नहीं दिया अपने खून से वो सबूत लिख दिया जो ना संयुक्त राष्ट्र मिटा सका ना अमेरिका झुठला सका और ना पाकिस्तान नकार सका कसाब की गिरफ्तारी ने सारी साजिशों को बेनकाब कर दिया था उसकी जुबान से निकला कराची का कैंप मुरीद के एक लश्कर हेडक्वार्टर हाफिज सैद जकी उर रहमान लकवी आईएसआई के कर्नल सेटेलाइट फोन पर बैठे हैंडलर पाकिस्तानी नेवी की मिलीभगत जीपीएस पर सेट किए गए कोऑर्डिनेट और सब कुछ एफबीआई को जब कसाब से पूछताछ करने की इजाजत मिली तो वह भी दंग रह गए अमेरिका ने खुद माना कि यह हमला पाकिस्तान से प्लान हुआ संयुक्त राष्ट्र ने लश्कर और जमात दावा पर बैन लगाया हाफिज सईद को इसके बाद ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किया गया पाकिस्तान को मुंह छिपाना पड़ा और यह सब कुछ हुआ उस एक सिपाही के बलिदान की वजह से जिसने 42 गोलियां खाकर भी बंदूक नहीं छोड़ी उसके बाद जो ट्रायल चला वो अपने आप में इतिहास था कसाब ने कोर्ट में कबूल किया उसने बताया कैसे और नौ आतंकवादियों को कराची में ट्रेनिंग दी गई उसने बताया कि हिंदुस्तान में हिंदू लोग मुसलमान को कैसे मार रहे हैं
सर्वोच्च सम्मान और अमर विरासत
उनसे कहा गया कि आप जाकर बदला लो काफिरों को मारो उसने बताया कि उन्हें हुक्म था अगर पकड़े गए तो खुद को उड़ा लेना जिंदा मत लौटना मगर तुकाराम उमले ने उससे वह मौका छीन लिया कसाब की गवाही ने पाकिस्तान के सारे झूठ की पोल खोल दी 21 नवंबर 2012 को जब उसे फांसी दी गई तो पूरी दुनिया ने देखा यह कोई लोकल गुंडागर्दी नहीं बल्कि सरहद पार से की गई प्लानिंग थी
26 जनवरी 2009: राष्ट्रपति द्वारा ‘अशोक चक्र’ सम्मान
इसके लिए तुकाराम जी को मिला सर्वोच्च सम्मान साल 26 जनवरी 2009 गणतंत्र दिवस दिल्ली की परेड राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने सबसे बड़ा शांतिल का पुरस्कार अशोक चक्र सम्मानित किया सच कहें तो जब तुकाराम जी की विधवा को यह सर्वोच्च सम्मान दिया गया तो पूरा देश रो पड़ा था अशोक चक्र उस कुर्बानी के सामने छोटा पड़ गया था उस दिन तो पूरा हिंदुस्तान तो करा उमले के सीने में बस गया था
गिरगाँव चौपाटी पर प्रतिमा: ‘एक झूठे मुल्क की साजिश को ज़िंदा पकड़ लिया
आज गिरगांव चौपाटी पर उनकी प्रतिमा खड़ी है हाथ में लाठी सीना तना हुआ नीचे लिखा है यहां एक सिपाही ने जान देकर एक झूठे मुल्क की साजिश को जिंदा पकड़ लिया हर 2611 को हजारों लोग आते हैं फूल चढ़ाते हैं माथा टेकते हैं नए बच्चे पूछते हैं कौन है और मां-बाप गर्व से बताते हैं कि यह वो शेर जिसने लाठी से एक के 47 को हरा दिया
तुकाराम ओमले कोई सुपर हीरो नहीं थे, वह हमारे घर के बड़े थे
सबसे बड़ी बात यह है कि तुकाराम ओमले कोई सुपर हीरो नहीं थे वो हमारी गली के भाई थे हमारे घर के बड़े थे जो सुबह चाय पीकर ड्यूटी जाते अपने बच्चों को स्कूल छोड़ते शाम को घर लौट कर बीवी से पूछते आज खाने में क्या बना है लेकिन जब वक्त आया तो वो शिवाजी बन गए हनुमान बन गए भगत सिंह बन गए और आज उनकी शहादत चीख-चीख कर कहती है हिंदुस्तान कोई कमजोर मुल्क नहीं यहां माएं ऐसी पैदा होती हैं जो अपने लाल को सीने से लगाकर कहती हैं जा बेटा देश के काम आजा उनकी कुर्बानी आज भी हर उस जवान के सीने में धकती है जो बॉर्डर पर खड़ा है हर उस पुलिस वाले की लाठी में जो रात के अंधेरे में गश लगाता है हर उस मां की आंखों में जो अपने बेटे को वर्दी पहनाकर विदा करता है
अमर शहादत: एक सिपाही जिसने अपना कल हमारे आज के लिए कुर्बान कर दिया
इसीलिए आज 2611 के मौके पर हम कहेंगे कि तुकाराम जी मरे नहीं है वो अमर हैं हर उस हिंदुस्तानी के सीने में अमर है जो देश के लिए जीता है उनकी वह पकड़ आज भी कसाब की राइफल नहीं बल्कि उस दुश्मन की गर्दन दबाए है जो इस मिट्टी पर गिद्ध नजर रखता है उनकी शहादत आज भी हर हिंदुस्तानी को कहती है कि अपने जांबाजों को कभी भूलना मत क्योंकि हमारा हिंदुस्तान सुरक्षित इसलिए है क्योंकि कभी किसी तुकाराम उमले ने अपना कल हमारे आशिक के लिए कुर्बान कर दिया था इसलिए आज अपनी आंखों में आंसू लाकर नमन कीजिए उस वीर को जिसने खून से लिख दिया हिंदुस्तान के लाल गोलियां खा सकते हैं मगर झुकते नहीं है जरूरत पड़े तो मिट जाते हैं तुकाराम उमले साहब आप अमर रहें जय हिंद जय भारत वंदे मातरम



