एक चाय बेचने वाले ने खड़ी की 2000 करोड़ की कंपनी: विक्रम टी के संस्थापक रमेश भाई पटेल की ‘कड़क’ कहानी

रमेश भाई पटेल

I. परिचय: प्रधानमंत्री मोदी से भी ‘बड़े’ चाय वाले?

अक्सर हम संघर्ष की कहानियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चाय बेचने वाले सफर का जिक्र सुनते हैं, लेकिन शुभंकर मिश्रा के इस पॉडकास्ट में रमेश भाई पटेल को उनसे भी ‘बड़ा’ चाय वाला बताया गया है। इसका कारण है उनका 50 साल का लंबा तजुर्बा और चाय के व्यवसाय में उनकी गहरी विशेषज्ञता। 1975 से शुरू हुआ यह सफर आज एक विशाल व्यापारिक साम्राज्य में बदल चुका है

II. संघर्ष के दिन: बिलासपुर का वह छोटा सा चाय का ठेला

रमेश भाई पटेल की कहानी किसी फ़िल्मी पटकथा जैसी है। एक गरीब किसान का बेटा जब नौकरी की तलाश में घर से निकला, तो उसके पास न तो बड़ी डिग्री थी और न ही पैसा।

  • पहली नौकरी: उन्होंने बिलासपुर में एक छोटे से चाय के ठेले पर काम करना शुरू किया, जहाँ उन्हें मात्र 600 रुपये महीना मिलता था।
  • हुनर की सीख: चाय की केतली और भाप के बीच उन्होंने ‘टी ब्लेंडिंग’ (Tea Blending) की अनजानी कला सीखी। उन्हें तब अंदाज़ा नहीं था कि यही हुनर एक दिन उन्हें हज़ारों करोड़ का मालिक बनाएगा।

III. आपदा को अवसर में बदला: राख से फिर जन्म

व्यापार के शुरुआती दिनों में एक बड़ा हादसा हुआ जब उनकी दुकान या गोदाम में भीषण आग लग गई। लोगों को लगा कि अब यह लड़का कभी उठ नहीं पाएगा, लेकिन रमेश भाई ने फिर से शून्य से शुरुआत की।

  • साइकिल से साम्राज्य तक: एक समय वह था जब वह साइकिल पर चाय बेचते थे। आज वही व्यापार विक्रम टी के रूप में देश भर में पहचाना जाता है।
  • विशाल साम्राज्य: आज उनका ‘भाईश्री ग्रुप’ केवल चाय तक सीमित नहीं है, बल्कि रियल एस्टेट, फाइनेंशियल एडवाइजरी, एजुकेशन और आईपीजी जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ 2000 करोड़ का साम्राज्य है।

IV. सफलता के मंत्र: विश्वास और गुणवत्ता

रमेश भाई ने अपनी सफलता के कुछ प्रमुख सिद्धांतों को साझा किया:

  1. विश्वास: “मैं जो भी काम करता हूँ, विश्वास के साथ करता हूँ”।
  2. गुणवत्ता (Quality): ज्यादा पैसा कमाने के लालच में न पड़ें, केवल अपनी क्वालिटी पर ध्यान दें ।
  3. ईमानदारी: शून्य से शुरुआत करते समय ईमानदारी और लगन ही एकमात्र पूँजी होती है।

V. नई पीढ़ी के लिए सलाह

पॉडकास्ट के अंत में रमेश भाई ने आज के युवाओं और उद्यमियों के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें कहीं:

  • शिक्षा का महत्व: पहले के समय में बिना पढ़े-लिखे काम चल जाता था, लेकिन आज की पीढ़ी के लिए बेहतर शिक्षा और स्टडी अनिवार्य है।
  • पारिवारिक एकता: परिवार को साथ लेकर चलें। “गम खाना सीखें और थोड़ा भूलना सीखें” (दूसरों की गलतियों को माफ करना सीखें)। जो सबको साथ लेकर चलता है, वही आगे बढ़ता है।
  • विरासत को सँभालें: यदि विरासत में बिज़नेस मिला है, तो पहले उसे सँभालें और अनुभव मिलने के बाद ही दूसरे बिज़नेस में कदम रखें।

VI. निष्कर्ष: इरादा बड़ा होना चाहिए

रमेश भाई पटेल की कहानी साबित करती है कि व्यापार शुरू करने के लिए बड़ी शुरुआत नहीं, बल्कि बड़ा इरादा चाहिए। एक साइकिल वाले लड़के का देश का बड़ा उद्यमी बनना उन हज़ारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी मानते हैं।

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