I. परिचय: एक मासूम मुस्कान और बिजली जैसी रफ्तार
दिव्या भारती केवल एक अभिनेत्री नहीं थीं, वे एक ऐसी रोशनी थीं जो पर्दे पर आते ही छा जाती थीं। महज 19 साल की उम्र और केवल 2-3 साल के करियर में उन्होंने वो मुकाम हासिल किया जो कलाकारों को पूरी उम्र लग जाती है। विश्वात्मा, दीवाना और शोला और शबनम जैसी फिल्मों ने उन्हें रातों-रात सुपरस्टार बना दिया। लोग उनमें महान कलाकार श्रीदेवी की परछाई देखते थे।
II. साजिद नाडियावाला और गुप्त निकाह
दिव्या की मुलाकात प्रोड्यूसर साजिद नाडियावाला से ‘शोला और शबनम’ के सेट पर हुई। बहुत कम समय में दोनों को प्यार हुआ और 1992 में उन्होंने इस्लामिक तरीके से शादी कर ली। दिव्या का नाम बदलकर सना नाडियावाला हो गया। हालांकि, करियर पर असर न पड़े, इसलिए इस शादी को दुनिया से छिपाकर रखा गया था।
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III. 5 अप्रैल 1993: वह आखिरी काली रात
5 अप्रैल 1993 की तारीख दिव्या भारती की जिंदगी का आखिरी दिन साबित हुई। उस दिन की कुछ महत्वपूर्ण कड़ियाँ इस प्रकार हैं:
- दिन की शुरुआत: दिव्या हैदराबाद में शूटिंग कर रही थीं। पैर में चोट होने के बावजूद उन्होंने काम किया और शाम को मुंबई के वसुआ स्थित अपने फ्लैट (तुलसी अपार्टमेंट, 5वीं मंजिल) पहुँची।
- नए घर की खुशी: उसी दिन उन्होंने मुंबई में अपना 4 बेडरूम का नया फ्लैट भी खरीदा था और वे बेहद खुश थीं।
- घर पर मेहमान: रात करीब 9 बजे फैशन डिजाइनर नीता लुल्ला और उनके पति डॉक्टर श्याम दिव्या के घर पहुँचे। घर में उनकी मेड (अमृता) भी मौजूद थी।
- हादसा: रात 11 बजे के करीब, दिव्या किचन की ओर गईं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वे खिड़की की 12 इंच चौड़ी मुंडेर पर बैठने की कोशिश कर रही थीं। शराब के नशे में संतुलन बिगड़ा और वे सीधे 5वीं मंजिल से नीचे गिर गईं।
IV. अनसुलझे सवाल और रहस्यमयी बातें
पुलिस ने 5 साल (1993-1998) तक इस केस की जांच की और इसे एक एक्सीडेंटल डेथ बताकर बंद कर दिया। लेकिन कुछ बातें आज भी खटकती हैं:
- खिड़की का रहस्य: उस खिड़की में ग्रिल नहीं थी और खिड़की का ‘ऑटो स्टॉपर’ (सेफ्टी मैकेनिज्म) उस दिन काम नहीं कर रहा था।
- पार्किंग का संयोग: जिस जगह दिव्या गिरीं, वहां हमेशा गाड़ियाँ खड़ी रहती थीं, लेकिन उस रात एक भी गाड़ी वहां नहीं थी।
- गवाह की मौत: दिव्या की मौत के ठीक एक महीने बाद, उनकी आखिरी गवाह यानी उनकी मेड की भी हार्ट अटैक से मौत हो गई।
V. श्रीदेवी के साथ अजीब इत्तेफाक
दिव्या भारती की तुलना अक्सर श्रीदेवी से होती थी। विडंबना देखिए कि दिव्या की मौत के 25 साल बाद 2018 में श्रीदेवी की मौत भी दुबई के एक होटल में हुई। दोनों ही मामलों में जांच का निष्कर्ष एक ही था—‘एक्सीडेंटल डेथ’।
VI. निष्कर्ष: एक अधूरी कहानी
1998 में मुंबई पुलिस ने यह केस बंद कर दिया, लेकिन लोगों के जेहन में यह आज भी खुला है। साजिद नाडियावाला को क्लीन चिट मिल गई, पर ‘हादसा, खुदकुशी या मर्डर’ की बहस आज भी खत्म नहीं हुई है दिव्या भारती एक ऐसी संभावना थीं जो पूरी नहीं हो पाई। उनकी कहानी हमें याद दिलाती है कि शोहरत और चकाचौंध के पीछे गहरे अंधेरे भी हो सकते हैं।
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