वेनेजुएला की ‘डकैती’ और अमेरिका का दोहरा चेहरा: एक विस्तृत विश्लेषण

वेनेजुएला

I. प्रस्तावना: लोकतंत्र की आड़ में एक बड़ी ‘लूट’

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी महज एक कानूनी कार्रवाई नहीं है, बल्कि इसे एक “दिन-दहाड़े हुई डकैती” के रूप में देखा जा रहा है। लोकतंत्र का रक्षक होने का दावा करने वाले अमेरिका ने एक संप्रभु राष्ट्र के राष्ट्रपति को उनकी पत्नी के साथ उनके बेडरूम से निकालकर जिस तरह अपमानित किया, वह दुनिया को एक कड़ा संदेश देता है: “अगर आप कमजोर हैं, तो आपके पास कितना भी तेल या जनता का वोट हो, आपकी कोई औकात नहीं है”। यह कहानी केवल अमेरिका और वेनेजुएला की नहीं, बल्कि गिरते हुए डॉलर की साख, कॉर्पोरेट वॉर और वैश्विक बादशाहत की है।

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II. कैसे हारा वेनेजुएला? (मिसाइल नहीं, गद्दारी से हुई हार)

वेनेजुएला कोई छोटा-मोटा देश नहीं था। उसके पास रूस के सुखोई फाइटर जेट्स और S-300/S-400 जैसे मिसाइल डिफेंस सिस्टम थे। फिर भी, अमेरिका ने बिना मिसाइल चलाए कुछ ही घंटों में पूरे देश पर कब्जा कैसे कर लिया? इसका जवाब ‘घर के गद्दारों’ में छिपा है। डोनाल्ड ट्रंप और सीआईए (CIA) ने वही किया जो 250 साल पहले अंग्रेजों ने भारत में किया था—रॉबर्ट क्लाइव ने मीर जाफर को खरीदा था, और यहाँ ट्रंप ने वेनेजुएला के जनरलों और नेताओं को खरीद लिया।

  1. नेताओं की खरीद: कल तक अमेरिका को गाली देने वाले नेता डॉलर की गड्डियों के आगे बिक गए।
  2. जनरल का सौदा: आर्मी ऑफिसर्स को धमकी दी गई कि यदि वे लड़ेंगे तो उन्हें ‘वॉर क्रिमिनल’ घोषित किया जाएगा, लेकिन यदि वे चुपचाप हट जाते हैं, तो उन्हें लाखों डॉलर और अमेरिका में घर मिलेगा।
  3. कठपुतली सरकार: विपक्ष को ‘मीर जाफर’ बनाकर गद्दी पर बिठाने की तैयारी की गई।

III. अमेरिका को वेनेजुएला से क्या चाहिए?

हालांकि मीडिया इसे केवल तेल की लड़ाई बता रहा है, लेकिन हकीकत इससे कहीं गहरी है:

1. पेट्रो-डॉलर का अस्तित्व

अमेरिका की पूरी ताकत इस बात पर निर्भर है कि दुनिया का तेल केवल डॉलर में खरीदा-बेचा जाए। मादुरो तेल को अन्य करेंसी (चीनी युवान, ब्रिक्स करेंसी या क्रिप्टो) में बेचने की योजना बना रहे थे, जो डॉलर की बादशाहत के लिए सीधा खतरा था। सद्दाम हुसैन और मुअम्मर गद्दाफी के साथ भी अमेरिका ने यही किया था जब उन्होंने डॉलर को चुनौती दी थी।

2. सोने की लूट

वेनेजुएला के पास लैटिन अमेरिका का सबसे बड़ा सोने का भंडार (लगभग 161 टन सेंट्रल बैंक में और 10,000 टन जमीन के नीचे) है। यह सोना ‘लिक्विड कैश’ की तरह है जिसे अमेरिका अपनी गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए तुरंत इस्तेमाल कर सकता है।

3. एलन मस्क और दुर्लभ खनिज (Minerals)

एलन मस्क की टेस्ला और आधुनिक तकनीक के लिए ‘कोल्टन’ और ‘लिथियम’ जैसे मिनरल्स की आवश्यकता है, जो वेनेजुएला में प्रचुर मात्रा में हैं मस्क का पुराना ट्वीट—”हम जिसका चाहें उसका तख्तापलट करेंगे”—इस कॉर्पोरेट भूख को दर्शाता है।

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IV. डिजिटल गुलामी का डरावना चेहरा

मादुरो की गिरफ्तारी से ठीक पहले वेनेजुएला पर एक अदृश्य हमला हुआ—साइबर अटैक। पूरा कम्युनिकेशन सिस्टम ठप हो गया, रडार अंधे हो गए और जीपीएस ने काम करना बंद कर दिया। यह डिजिटल गुलामी का सबसे डरावना उदाहरण है। यदि आपका इंटरनेट, जीपीएस और बैंकिंग सर्वर अमेरिकी कंपनियों (जैसे स्टारलिंक) के हाथ में है, तो आप कभी भी ‘अंधे और बहरे’ बनाए जा सकते हैं। यही कारण है कि रूस, चीन और उत्तर कोरिया अपनी स्वतंत्र तकनीक विकसित कर रहे हैं।

V. अमेरिका की ‘प्लेबुक’ (सत्ता बदलने का फिक्स फार्मूला)

अमेरिका की रणनीति क्रूर और सोची-समझी होती है:

  • आर्थिक सफोकेशन (Suffocation): पहले कड़े प्रतिबंध (Sanctions) लगाओ ताकि देश में दवाइयों और भोजन की कमी हो जाए।
  • माहौल बनाना: मीडिया के जरिए यह प्रचार करना कि राष्ट्रपति निकम्मा है और देश डूब रहा है।
  • विपक्ष को खरीदना: जब जनता भूखी और परेशान हो, तो ‘लोकतंत्र’ के नाम पर हमला करो और अपनी पसंद की सरकार बिठाओ।

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VI. भारत के लिए सबक और निष्कर्ष

वेनेजुएला की यह घटना दुनिया के हर देश, विशेषकर भारत के लिए तीन बड़े सबक छोड़ती है :

  1. गद्दारों से सावधान: बड़ी लड़ाइयाँ बाहरी दुश्मनों से नहीं, बल्कि घर के भेदियों से हारी जाती हैं।
  2. आत्मनिर्भरता: अपनी करेंसी, अपना पेमेंट सिस्टम (जैसे UPI), और अपनी टेक्नोलॉजी होना अनिवार्य है, अन्यथा आप एक ‘स्विच’ के जरिए गुलाम बन सकते हैं।
  3. शक्ति ही सत्य है: अंतरराष्ट्रीय कानून केवल कमजोरों के लिए हैं। यदि आपके पास अपनी रक्षा के लिए ‘जहर’ (परमाणु शक्ति या सैन्य ताकत) नहीं है, तो आपको कुचल दिया जाएगा।

जैसा कि कवि दिनकर ने कहा था—“क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो”। शांति की बात केवल वही सांप कर सकता है जिसके पास जहर हो। यह दुनिया एक जंगल है जहाँ केवल ताकतवर ही सुरक्षित है। वेनेजुएला में आज जो धुआँ उठा है, वह कल किसी और के घर तक भी पहुँच सकता है।

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