क्या दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर है? डोनाल्ड ट्रंप, वेनेजुएला और ‘तबाही का कैलेंडर’

वर्ल्ड वॉर 3

I. परिचय: ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ या ‘अमेरिका ओनली’ नीति?

शुभंकर मिश्रा के अनुसार, जनवरी 2026 में दुनिया एक ऐसी हॉरर फिल्म के ट्रेलर जैसी स्थिति में पहुँच गई है, जहाँ कानून और आजादी केवल डोनाल्ड ट्रंप के मूड पर निर्भर है। ट्रंप ने खुद को वेनेजुएला का ‘कार्यकारी राष्ट्रपति’ घोषित कर 250 साल के अमेरिकी इतिहास को बदल दिया है।

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II. जनवरी 2026: तबाही का कैलेंडर

साल के पहले 11 दिनों ने दुनिया की दिशा बदल दी है:

  • 1 जनवरी: अमेरिकी कमांडो ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को उनके घर से उठा लिया। वाइट हाउस ने इसे ‘आजादी’ कहा, लेकिन सवाल मानवाधिकारों पर उठे।
  • 3 जनवरी: अमेरिकी नेवी ने रूस की परमाणु सबमरीन और तेल टैंकर को जब्त कर लिया, जिसे रूस ने ‘डकैती’ करार दिया।
  • 5 जनवरी: भारत पर 50% का ऐतिहासिक टैक्स (Tariff) लगा दिया गया। ट्रंप का तर्क था कि पीएम मोदी ने उन्हें फोन नहीं किया, जिससे उनका ईगो हर्ट हुआ।
  • 7 जनवरी: पुतिन और किम जोंग उन की इमरजेंसी मीटिंग हुई, जो अमेरिका के खिलाफ एक नए गुट की तैयारी का संकेत है।
  • 11 जनवरी: ट्रंप ने डेनमार्क को धमकी दी कि या तो ग्रीनलैंड हमें बेच दो या हम उसे ‘सुरक्षा’ के नाम पर ले लेंगे। यह नाटो (NATO) को तोड़ने वाला कदम माना जा रहा है।

III. डॉलर की बादशाहत और भारत को सजा

भारत पर लगाए गए 50% टैक्स के पीछे असली वजह ‘ईगो’ नहीं बल्कि ‘डॉलर ट्रंप’ का डर है। भारत, रूस और चीन मिलकर डॉलर के बजाय अपनी करेंसी में व्यापार (BRICS के जरिए) करने की तैयारी कर रहे हैं । अमेरिका को डर है कि यदि भारत जैसा बड़ा बाजार डॉलर छोड़ देगा, तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगी।

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IV. युद्ध की नई शक्ल: साइबर वॉर और एलन मस्क

आज की जंग केवल जमीन पर नहीं, बल्कि स्पेस और इंटरनेट में भी छिड़ी है।

  • एलन मस्क की भूमिका: वेनेजुएला और ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए मस्क की कंपनी ‘स्टारलिंक’ का इस्तेमाल सूचना ब्लैकआउट को तोड़ने के लिए किया जा रहा है।
  • साइबर अटैक का खतरा: रूस और चीन ने साइबर आर्मी को एक्टिव कर दिया है। डर है कि एक क्लिक से पूरे शहर के पावर ग्रिड हैक किए जा सकते हैं, जिससे अस्पताल, एटीएम और फोन सब बंद हो जाएंगे।

V. अमीरों की तैयारी: बंकरों का बढ़ता बाजार

सिलिकॉन वैली के अरबपति और बड़े बैंकर न्यूजीलैंड और स्विट्जरलैंड में बंकर बनवा रहे हैं। इन बंकरों में 5 साल का राशन और ऑक्सीजन जमा किया जा रहा है । यह इस बात का संकेत है कि ‘आसमान में सब कुछ ठीक नहीं है’ और परमाणु युद्ध का खतरा वास्तविक है ।

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VI. आर्थिक तबाही: आम आदमी पर असर

बाजार में फिलहाल ‘तूफान से पहले की शांति’ है। यदि रूस या ईरान ने तेल का रास्ता रोका, तो तेल की कीमतें आसमान छुएंगी:

  • दूध, सब्जी और दवाइयां दोगुनी महंगी हो जाएंगी।
  • बैंकों की ब्याज दरें और घर-कार की EMI बढ़ जाएंगी ।
  • घाटे से बचने के लिए कंपनियां नौकरियां छीन लेंगी।

VII. निष्कर्ष: सुपर प्रेसिडेंट या तबाही का कारण?

डोनाल्ड ट्रंप खुद को अमेरिका से बड़ा (जैसे कभी हिटलर जर्मनी से बड़ा हो गया था) साबित करने की कोशिश कर रहे हैं]। माचिस की तीली जल चुकी है और बारूद के ढेर पर गिर चुकी है। अब सवाल यह नहीं है कि धमाका होगा या नहीं, सवाल यह है कि जब होगा, तब हम कहाँ होंगे?]

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