ममता vs ED: बंगाल चुनाव से पहले ‘खेला होबे’ या ‘डेटा डकैती’?

ममता बनर्जी बनाम ईडी

I. परिचय: कोलकाता की सड़कों पर हाई-वोल्टेज ड्रामा

8 जनवरी 2026 की सुबह कोलकाता के लाउडन स्ट्रीट पर जो हुआ, उसने भारतीय राजनीति के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया। आई-पैक (I-PAC) के दफ्तर में ED का छापा पड़ा और खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहाँ पहुँच गईं। शुभंकर मिश्रा सवाल उठाते हैं कि क्या यह लोकतंत्र को बचाने की जंग थी या भ्रष्टाचार के सबूतों को मिटाने की कोशिश?

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II. आई-पैक (I-PAC) का लैपटॉप और ‘वाटरगेट’ का साया

ममता बनर्जी इस रेड को ‘बंगाल वाटरगेट’ कह रही हैं। 1972 के अमेरिकी वाटरगेट कांड का हवाला देते हुए वह आरोप लगा रही हैं कि बीजेपी एजेंसियां डेटा चुराकर टीएमसी की चुनावी रणनीति को बर्बाद करना चाहती हैं।

  • ब्रह्मास्त्र डेटा: आई-पैक के पास बंगाल के 7 करोड़ वोटरों का एक्सरे डेटा है—किस बूथ पर कौन नाराज है, किस गांव में किस जाति के कितने वोटर हैं, और ममता दीदी का अगला मास्टरस्ट्रोक क्या होगा। यदि यह डेटा लीक होता है, तो यह ‘डिजिटल डकैती’ जैसा है।

III. विटामिन ‘एम’ (Money) का खेल

ED का कानूनी तर्क यह है कि आई-पैक को दी जाने वाली करोड़ों की फीस असल में पुराने घोटालों का काला धन हो सकता है। बीजेपी के समर्थकों का मानना है कि यह रेड डेटा के बजाय टीएमसी की फंडिंग लाइन काटने के लिए थी। यदि चुनाव से पहले मैनेजमेंट कंपनी के खाते फ्रीज हो जाएं, तो पार्टी ‘पैरालाइज’ हो सकती है।

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IV. दोनों पक्षों पर उठते सवाल

शुभंकर मिश्रा निष्पक्ष विश्लेषण करते हुए दोनों पक्षों को कटघरे में खड़ा करते हैं:

  • ममता बनर्जी का पक्ष: पार्थ चटर्जी के घर से मिले 50 करोड़ कैश, राशन घोटाला और संदेशखाली जैसी घटनाओं को भुलाया नहीं जा सकता। जब एक मुख्यमंत्री खुद जांच रोकने पहुँचती है, तो शक गहराता है।
  • ED और केंद्र का पक्ष: पिछले 10 सालों में ED की 95% रेड केवल विपक्ष पर हुई है। सजा की दर (Conviction Rate) बहुत कम है, जिससे यह सवाल उठता है कि मकसद भ्रष्टाचार मिटाना है या विपक्ष को।

V. अस्तित्व की लड़ाई: बीजेपी और टीएमसी के लिए बंगाल क्यों जरूरी?

  • बीजेपी के लिए: यूपी में सीटें घटने के बाद बीजेपी के लिए बंगाल सबसे बड़ा ‘रिवाइवल’ पॉइंट है। यह उनके संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की धरती है, इसलिए साख का सवाल है।
  • ममता के लिए: उनके पास बंगाल के अलावा कुछ नहीं है। वह अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को सत्ता सौंपना चाहती हैं, लेकिन उन पर भी भ्रष्टाचार के आरोप हैं। यदि बंगाल गया, तो टीएमसी का भविष्य अंधकार में होगा।

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VI. निष्कर्ष: सैंडविच बना प्रशासन

इस लड़ाई में बंगाल के आईएएस और आईपीएस अधिकारी पिस रहे हैं—ममता का आदेश न मानें तो राज्य सरकार सस्पेंड करेगी, ED को रोकें तो केंद्र सरकार दिल्ली तलब करेगी। अंततः हार केवल आम नागरिक की हो रही है जिसका सिस्टम से भरोसा उठता जा रहा है।

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