डॉनल्ड ट्रंप और जेफरी एपस्टीन: सत्ता, ब्लैकमेल और रसूख के काले खेल का पर्दाफाश

डॉनल्ड ट्रंप

I. परिचय: एक ‘पावर नेटवर्क’ की डरावनी सच्चाई

शुभंकर मिश्रा का यह वीडियो किसी व्यक्तिगत विवाद की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस ‘पावर स्कैंडल’ के बारे में है जिसने दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इसमें राष्ट्रपति, उद्योगपति और सेलिब्रिटीज के एक ऐसे नेटवर्क का जिक्र है, जहाँ ताकत का इस्तेमाल लोगों को नियंत्रित करने और ब्लैकमेल करने के लिए किया जाता था। हाल ही में सामने आई तस्वीरों ने डॉनल्ड ट्रंप की मुश्किलों को बढ़ा दिया है और उनके राजनीतिक चरित्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।।

II. जेफरी एपस्टीन: रसूख और राजों का सौदागर

इस पूरे स्कैंडल का मुख्य केंद्र जेफरी एपस्टीन था। वह केवल एक रईस व्यक्ति नहीं था, बल्कि सत्ता के गलियारों में दलाली करने वाला एक ऐसा मोहरा था जो पहुँच और राज बेचता था।

  • ब्लैकमेल की रणनीति: एपस्टीन का मुख्य काम प्रभावशाली लोगों के बारे में गोपनीय सबूत जमा करना था, ताकि उनका इस्तेमाल भविष्य में उन्हें ब्लैकमेल करने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जा सके।
  • गुप्त ठिकाने: फ्लोरिडा, न्यूयॉर्क और खासकर उसका प्राइवेट आइलैंड ‘लिटिल सेंट जेम्स’, इस नेटवर्क के मुख्य अड्डे थे। यहाँ तक पहुँचने के लिए उसके निजी जेट ‘लोलिता एक्सप्रेस’ का इस्तेमाल होता था, जहाँ बिना किसी रोक-टोक के प्रभावशाली लोग आते-जाते थे।

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III. रसूखदारों का सिंडिकेट: हमाम में सब नंगे?

एपस्टीन के संपर्क केवल ट्रंप तक सीमित नहीं थे, बल्कि उसकी फाइलों में दुनिया के कई दिग्गजों के नाम दर्ज हैं:

  • राजनीतिक हस्तियाँ: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति और ब्रिटेन के शाही परिवार के सदस्यों (प्रिंस एंड्रयू) के नाम सीधे तौर पर चर्चा में आए।
  • कॉर्पोरेट दिग्गज: माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक जैसे बड़े व्यापारिक नामों की मौजूदगी ने यह साबित किया कि यह जाल बहुत गहरा था।
  • वैश्विक प्रभाव: वीडियो संकेत देता है कि इस नेटवर्क के तार अमेरिका के बाहर, यहाँ तक कि भारत के कुछ बड़े नामों तक भी जुड़े हो सकते हैं।

IV. एपस्टीन की जेल में मौत: एक बड़ा सवालिया निशान

जब 2019 में एपस्टीन की गिरफ़्तारी हुई, तो पूरी दुनिया को लगा कि अब सत्ता के गलियारों के सारे राज खुलेंगे। लेकिन सुनवाई से पहले ही जेल के अंदर उसकी रहस्यमयी मौत हो गई।

  • इत्तेफ़ाक या साज़िश: जिस रात उसकी मौत हुई, उस रात जेल के सुरक्षा कैमरे काम नहीं कर रहे थे और गार्ड सो रहे थे। कई लोग इसे आत्महत्या मानने को तैयार नहीं हैं।
  • खतरनाक जानकारी: माना जाता है कि एपस्टीन इतना कुछ जानता था कि अगर वह मुँह खोलता, तो कई देशों की सरकारें और ग्लोबल सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त हो सकता था।

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V. निष्कर्ष: क्या सिस्टम जवाबदेह होगा?

एपस्टीन की सहयोगी गिसलेन मैक्सवेल को सजा हो चुकी है, लेकिन असली सवाल उन ‘ताकतवर चेहरों’ का है जो आज भी पदों पर बैठे हैं।

यह मामला केवल एक व्यक्ति की छवि का नहीं, बल्कि उस सिस्टम की ईमानदारी का है जहाँ सत्ता और पहुँच को अपराध छिपाने की ढाल बना लिया जाता है। क्या ट्रंप और अन्य रसूखदार लोग इस बार बच निकलेंगे, या दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र में ‘सच’ की जीत होगी? एपस्टीन मर चुका है, लेकिन उसकी छोड़ी हुई फाइलें आज भी दुनिया की सबसे ताकतवर कुर्सियों के लिए एक दुःस्वप्न बनी हुई हैं।

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