जगन्नाथ विवाद पर स्पष्टीकरण: “राधा रानी के श्राप” की कथा और मेरी ओर से भक्तों से क्षमा याचना

jagannath controversy

I. भक्तों की चिंता और विश्वास पर आभार

सवाल और आरोप: पिछले 24 घंटों में आप में से बहुत सारे लोगों ने मुझे मैसेज कॉल और कमेंट करके पूछा कि जगन्नाथ मंदिर के बारे में जो वीडियो आपने डाला क्या उसमें जानकारी गलत थी अफवाह थी और अगर थी तो फिर आपने जानबूझकर मंदिर के बारे में भ्रमकता क्यों फैलाई। कई लोग थे जो चिंतित थे, कुछ हैरान थे कि यार मैं ऐसा कैसे कर सकता हूं। वो कह रहे थे कि आप तो खुद इतने धार्मिक व्यक्ति हैं आप कैसे सनातन के नाम पर भ्रामक प्रचार कर रहे हैं।

विश्वास मेरी पूँजी: सच कहूं तो मैं आप में से तमाम लोगों का दिल से आभारी हूं क्योंकि अनावश्यक आरोप लगाने के बजाय आप में से अधिकतर लोगों ने मुझसे सीधे यह सवाल पूछा और यह विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है।

सत्य कथन: इसलिए आज बिना लाग लपेट के साफ सरल शब्दों में मैं अपनी बात आपके सामने रखता हूं।

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II. ‘भक्ति बुक’ की शुरुआत और उद्देश्य

वीडियो की रिकॉर्डिंग: सबसे पहला सवाल, क्या जगन्नाथ मंदिर को लेकर जो वीडियो जिस पर भ्रामकता के आरोप लगे हैं, क्या वह मैंने रिकॉर्ड किया था? हाँ, सच है, मैंने रिकॉर्ड किया था। लेकिन उतना ही सच यह भी है कि वो विषय मेरा नहीं था, ना उसमें कोई ऐसी बात है जो मैंने खुद से बनाकर कही हो।

पुंडरीक गोस्वामी जी का मार्गदर्शन: देखिए, सनातन के बड़े संतों और साधुओं के निकट रहने का मुझे सौभाग्य मिलता रहता है। इसी प्रेम और मार्गदर्शन में मेरे एक निकट मित्र हैं पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज, जिन्होंने एक रोज़ मुझे एक सुझाव दिया कि शुभांकर, नई पीढ़ी को सनातन धर्म की सुंदर कथाएं, मंदिर की परंपराएं, भगवान की लीलाएं सरल शब्दों में पहुंचाई जाए तो यह अच्छा रहेगा। उनका यह तर्क था कि आप पत्रकारिता कर रहे हैं, करते रहिए, लेकिन पत्रकारिता के साथ-साथ अगर धर्म क्षेत्र में भी कुछ ऐसा किया जाए तो इसका लाभ आने वाली पीढ़ियों को होगा। वो बात मेरे मन में स्पर्श कर गई और वहीं से हमने भक्ति बुक की शुरुआत की।

भक्ति बुक का लक्ष्य: भक्ति बुक की शुरुआत के पीछे हमारा उद्देश्य सिर्फ इतना था कि संतों की वाणी, पुराणों की कथाएं, ईश्वर की महिमा और भारत के अनोखे मंदिरों की अनोखी परंपराएं जो हैं, उन्हें सरल सहज तरीके से लोगों तक पहुंचाई जाए ताकि नई पीढ़ी जुड़ी रहे।

कार्य प्रक्रिया: और इस प्रक्रिया में हम दो तरह के काम करते हैं: एक, हम विद्वानों को बुलाते हैं, कथावाचकों को बुलाते हैं, संतों को बुलाते हैं, धर्म क्षेत्र के बड़ी हस्तियां जो हैं, उन्हें बुलाते हैं और उनसे सुनते समझते हैं और वो कहानियाँ किस्से आप तक पहुंचाते हैं। और दूसरा, कि वो कथाएं, वो जानकारियाँ जो पहले से प्रकाशित और प्रचलित हैं, उन्हें हम आप लोगों तक पहुंचाते हैं।

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III. विवादित ‘राधा रानी के श्राप’ वाली कथा

जगन्नाथ जी के प्रति श्रद्धा: अब आती है बात जगन्नाथ जी को लेकर। मैं पिछले कई वर्षों से जगन्नाथ जी का छोटा सा भक्त रहा हूं। जब भी मौका मिलता है, मैं पुरी जगन्नाथ जाता हूं। वहाँ की हवा, वहाँ के भोग, वहाँ की महिमा, सब कुछ मन को छूते हैं। आप में से कईयों ने मेरा पुरी शंकराचार्य जी के साथ पॉडकास्ट देखा होगा। वो भी इसी भावना से किया गया था कि जगन्नाथ जी की लीला, जगन्नाथ जी की महिमा को और गहराई से मैं समझूं और मेरे माध्यम से जो लोग जुड़े हुए हैं, उन तक हम पहुंचाएं।

विवाद की जड़: और इसी जगन्नाथ जी के प्रेम, जिज्ञासा, सीखने की प्रक्रिया में हमारे सामने कथा आई थी। कथा थी राधा रानी के श्राप वाली कथा, जिसमें कहा गया कि यदि अविवाहित स्त्री पुरुष के साथ, जिससे वो प्रेम करती है, मंदिर में प्रवेश करें तो उसका रिश्ता टूट जाता है। यह कहा गया कि राधा रानी कभी यहां आई थीं, उन्हें रोका गया, उन्होंने यह श्राप दिया।

कथा का स्रोत (प्रकाशन): यह कथा जो मैंने अपने मुख से सुनाई, जिसको लेकर इतना विवाद खड़ा हुआ, जिसको लेकर भ्रमकता के आरोप लगे, सवाल उठे कि आपने धर्म को लेकर गलत प्रचार किया। बड़े विनम्रता से मैं कहना चाहूँगा कि यह कथा ना नई थी ना अनोखी थी। अगर आप Google पर जाएं और लिख दें ‘राधा रानी श्राप जगन्नाथ पुरी’, आपको इंटरनेट पर सैकड़ों-सैकड़ों भक्ति चैनलों पर यह कथा मिल जाएगी। इस देश के जितने बड़े टीवी चैनल हैं, उनकी जो वेबसाइट है, उस पर यह कथा प्रकाशित है और आज से नहीं, सालों से प्रकाशित है। YouTube पर धर्म के कई ऐसे बड़े पेजेस हैं जहाँ पर यह कथा सुनाई गई है, इस कथा को दोहराया गया है। धार्मिक मंचों पर भी कई बार इस कथा का ज़िक्र हुआ है।

लोक कथा का भ्रम: यानी यह कथा मेरी कोई निजी कल्पना नहीं थी। हमने इसे उसी तरह माना जैसे लोक कथाएं, मान्यताएं या मंदिर की कथाएं हमारे धर्म परंपरा का सामान्य हिस्सा होती है। क्योंकि भक्ति बुक में हर रोज़ हम अनगिनत कहानियाँ आप तक पहुंचाते हैं, उसी में से एक कहानी यह भी थी, जिसे श्रद्धा भरे उत्साह से एक सामान्य कथा मानकर हमने रिकॉर्ड कर दिया।

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IV. गलती का एहसास और लिया गया कदम

भ्रामक धारणा का पता चलना: और उसके बाद ओसा या पुरी के कई भाई बहनों ने मुझे बताया कि यह आधिकारिक मान्यता नहीं है, यह भ्रामक धारणा पैदा कर सकती है।

तत्काल कार्रवाई: उसके बाद बिना एक क्षण गवाए मैंने वह वीडियो डिलीट कर दिया, क्योंकि हमारा मकसद कभी भी गलत जानकारी फैलाना नहीं था। हम तो वही साझा कर रहे थे जो वर्षों से प्रकाशित था। और हम आपको तमाम वेबसाइट्स के स्क्रीनशॉट दिखा रहे हैं। मैं किसी का नाम लेकर किसी विशेष को हाईलाइट करना नहीं चाहता हूँ।

माफ करने की मंशा: और इसीलिए जब अपने ही लोगों ने कहा कि यह ठीक नहीं है, तो सुनना और मानना हमने जरूरी समझा। हमने उनकी भावनाओं का सम्मान किया। अब सवाल उठता है कि क्या हमारी ओर से कोई गलत इरादा था? जवाब है नहीं, बिल्कुल भी नहीं। ना तो हमने कोई अफवाह गड़ी, ना किसी परंपरा का अपमान किया, ना जानबूझकर किसी की आस्था को चोट पहुँचाने की चाह थी हमारी।

सनातनी होने का बोध: हमारी गलती बस इतनी थी कि हमने बस उसी को आगे बढ़ाया जैसा पहले से दर्ज था, पहले से प्रकाशित था। लेकिन फिर भी सनातनी होने के नाते और तमाम उन लोगों से जिनके हमें मैसेजेस आए, उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए इस बात का एहसास करते हुए कि धर्म की अच्छी चीजों को ही आगे जाना चाहिए, बिना लाग लपेट के हम यह कह रहे हैं।

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V. सच्चे मन से क्षमा याचना और भविष्य की दिशा

विनम्र क्षमा: अगर किसी श्रद्धालु की, किसी उड़िया भाई बहन की, किसी भक्त की भावनाएं हमारे इस अच्छी नीयत वाली कोशिश में आहत हुई, तो मैं इसे अपनी कमी मानते हुए उनसे दिल से क्षमा मांगता हूँ।

पूरी धाम मेरे लिए घर: जगन्नाथ जी मेरे आराध्य हैं, पुरी धाम को मैं अपने घर जैसा समझता हूँ और उड़ीसा के लोगों ने मुझे बहुत प्यार दिया है। वो मेरे अपने लोग हैं।

संवेदनशीलता और सम्मान: जो वीडियो हमने हटाया, वो सम्मान और संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर हटाया गया था। साथ ही हम यह आशा करते हैं कि जिन प्लेटफॉर्म्स पर यह पुरानी कथा अभी भी मौजूद है, वे भी इसे हटाएँ ताकि कोई भी भक्त भ्रमित ना हो।

‘भक्ति बुक’ का बड़ा दृष्टिकोण: भक्ति बुक अभी एक नया प्रयास है, लेकिन इसका दृष्टिकोण बहुत बड़ा है। हम चाहते हैं कि भारत के अनसुने, अनकहे, कम प्रचलित मंदिर, लोक कथाएं, संतों की साधना, छोटी-छोटी परंपराएं, ईश्वरीय महिमाएं अगली पीढ़ी तक पहुँचे। लोगों को सनातन में हम और जोड़ें, हमारे मंदिरों की खूबसूरती उनको समझाएँ।

अंतिम आग्रह और संकल्प: हमें आपका आशीर्वाद, आपका साथ और आपके मार्गदर्शन की जरूरत है, इसलिए आप हमारी इस मुहिम से जुड़िएगा, हमारी ताकत को मजबूत कीजिएगा। एक बार फिर से अगर मेरी किसी बात से आपका मन दुखा है, अगर किसी भी उड़िया भाई बहन या किसी भक्त को पीड़ा पहुँची है, तो मैं आपसे सच्चे मन से क्षमा मांगता हूँ। मेरा एकमात्र प्रयास यही है कि जगन्नाथ जी की महिमा, सनातन की कहानियाँ और हमारी विरासत की चमक यह नई पीढ़ी तक सम्मान के साथ पहुँचे और यह प्रयास आगे भी चलता रहेगा।

सत्य, श्रद्धा और पूर्ण विनम्रता के साथ जय जगन्नाथ

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