I. परिचय: ‘कूल’ दिखने की होड़ और बाजार का कचरा
नए साल के जश्न के नाम पर शराब पीने की बढ़ती प्रवृत्ति समाज में एक स्टेटस सिंबल बन गई है। बाजार और विज्ञापनों ने लोगों के दिमाग में यह बात डाल दी है कि 31 दिसंबर की रात हाथ में शराब का गिलास न होना ‘बोरिंग’ होना है। जबकि असलियत में यह कोई रुतबा नहीं, बल्कि अपनी सेहत और भविष्य की बर्बादी का सौदा है।
II. महिलाओं पर शराब का अधिक घातक असर
शराब का असर महिलाओं पर पुरुषों के मुकाबले कहीं अधिक तेज और जानलेवा होता है। इसके पीछे कुछ जैविक कारण (Biological Facts) हैं:
- एंजाइम की कमी: महिलाओं के लिवर में अल्कोहल को तोड़ने वाला एंजाइम कम होता है, जिससे उनका लिवर पुरुषों की तुलना में जल्दी खराब हो जाता है।
- गंभीर बीमारियाँ: नियमित सेवन से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर और लिवर फेलियर जैसी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।
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III. आने वाली नस्लों पर प्रभाव: एक डरावना सच
शराब की लत केवल पीने वाले तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी को भी प्रभावित करती है:
- डीएनए में बदलाव: मेडिकल साइंस के अनुसार, माता-पिता की शराब की लत बच्चे के DNA स्ट्रक्चर को बदल सकती है।
- मानसिक कमजोरी: यदि कोई महिला निकट भविष्य में बच्चा प्लान कर रही है, तो आज का शराब सेवन बच्चे को जन्मजात मानसिक रूप से कमजोर और बीमार बना सकता है। बच्चा पैदा होने से पहले ही अपने माता-पिता के शौक की कीमत चुकाता है।
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IV. सामाजिक और पारिवारिक बर्बादी
शराब केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी छिन्न-भिन्न कर देती है:
- घरेलू हिंसा: आंकड़ों के अनुसार, अधिकांश घरेलू हिंसा के मामलों में शराब मुख्य कारण होती है। नशे में डूबा व्यक्ति अपने ही परिवार की खुशियों का गला घोंट देता है।
- सड़क हादसे: भारत में एक बड़ा प्रतिशत सड़क हादसों का मुख्य कारण ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ है, जहाँ एक की गलती कई परिवारों को उजाड़ देती है।
- झूठी दोस्ती: नशे की महफिल में साथ देने वाले दोस्त अक्सर मुसीबत के समय या बीमारी के दौरान बिल भरने के लिए साथ नहीं खड़े होते।
V. लिवर सिरोसिस: एक खामोश कातिल
- डब्ल्यूएचओ (WHO) के आंकड़े: दुनिया भर में हर साल लाखों मौतें शराब के कारण होती हैं।
- अंतिम समय तक पता न चलना: लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी तब तक पता नहीं चलती जब तक लिवर का बहुत बड़ा हिस्सा खराब न हो जाए। जब तक दर्द महसूस होता है, तब तक इंसान की जमापूंजी और जीने की उम्मीद, दोनों खत्म होने की कगार पर होती हैं।
VI. निष्कर्ष: फैसला आपके हाथ में
नए साल की शुरुआत पछतावे, उल्टियों और सिरदर्द के साथ नहीं, बल्कि होश और मुस्कान के साथ होनी चाहिए। शराब आपके रुतबे को नहीं बढ़ाती, बल्कि आपके परिवार का सुकून और बच्चों का भविष्य निगल जाती है।
याद रखिये, महफिल में ‘चीयर्स’ कहने वाले बहुत मिल जाएंगे, लेकिन अस्पताल के बेड और श्मशान की चिता के पास केवल अपना परिवार ही साथ खड़ा होता है। इसलिए, जाम तोड़ दीजिये, इससे पहले कि जाम आपकी जिंदगी के टुकड़े कर दे।
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