रावलपिंडी की राजनीतिक कब्रगाह: डेढ़ साल से लापता पूर्व प्रधानमंत्री
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की डेढ़ साल से सार्वजनिक रूप से गैरमौजूदगी ने दुनिया भर में सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या इमरान खान को भी उसी तानाशाही की भेंट चढ़ा दिया गया, जिसकी भेंट जुल्फिकार अली भुट्टो 1979 में चढ़े थे?
बेटे कासिम की चीख: “मेरे पिता ज़िंदा हैं या मर गए, पता नहीं”
इमरान खान के बेटे कासिम दुनिया से चीख-चीख कर मदद मांग रहे हैं और कह रहे हैं कि उनके पिता ज़िंदा हैं या मर गए, उन्हें नहीं पता। 845 दिनों से जेल में होने के बावजूद, पिछले छह हफ्तों से न कोई कॉल, न कोई मैसेज, न ही कोई मुलाकात हो पाई है।
साक्ष्य का अभाव ही सबसे बड़ा सबूत
जब वीडियो, तस्वीर, कोर्ट मीटिंग, वकीलों या परिवार को एक्सेस नहीं है, और जेल प्रशासन खामोश है, तो संदेह बड़ा हो जाता है। वक्ता के अनुसार, सबूतों का अभाव ही सबसे बड़ा सबूत नज़र आता है कि इमरान खान को रावलपिंडी की राजनीतिक कब्रगाह में दफन कर दिया गया है।
आखिरी सार्वजनिक उपस्थिति और वकीलों का संदेह
इमरान खान को आखिरी बार 16 मई 2024 को कोर्ट की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में देखा गया था। लेकिन सितंबर 2025 में उनकी एक पेशी के दौरान वकीलों ने संदेह जताया कि जो शख्स नज़र आ रहा है, वह न तो इमरान खान जैसा दिख रहा है, न ही आवाज़ उनकी है। तभी से यह डर गहराया कि उन्हें मार दिया गया है।
मुलाकात पर पाबंदी और दमन के सबूत
इमरान खान की सुरक्षा और जीवित होने के सबूत मांगने वालों को पाकिस्तान में दमन का सामना करना पड़ रहा है।
बहनों और मुख्यमंत्री को जेल के बाहर लाठियां
कोर्ट के आदेश के बावजूद, जब इमरान की बहनें उनसे मिलने गईं, तो उन्हें जेल के बाहर पिटाई का सामना करना पड़ा। खैबर पख्तून ख्वा के मुख्यमंत्री भी उनसे मिलने गए, लेकिन मिलने की मांग पर उन्हें लाठियां पड़ीं।
रक्षा मंत्री का झूठ: “मखमली बिस्तर, टीवी और जिम”
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ अफवाहों को फर्जी बताते हुए कह रहे हैं कि इमरान खान को तो मखमली बिस्तर, टीवी, जिम और बाहर का खाना दिया गया है। यह बयान वास्तविक स्थिति पर पर्दा डालने की कोशिश लगता है, क्योंकि अगर वह स्वस्थ हैं तो उनकी एक तस्वीर या 20 सेकंड का वीडियो क्यों नहीं जारी किया जाता?
ट्रांसपेरेंसी से डर क्यों? एक तस्वीर क्यों नहीं जारी होती?
इमरान खान के जिंदा होने के ‘प्रूफ ऑफ़ लाइफ’ की मांग अंतरराष्ट्रीय समुदाय और उनके बेटे द्वारा लगातार की जा रही है। अगर वे लोकतांत्रिक देश होने का दावा करते हैं, तो कोर्ट की अनुमति के बाद भी उन्हें परिवार से मिलने क्यों नहीं दिया जा रहा?
आसिम मुनीर और इमरान खान की दुश्मनी की कहानी
इमरान खान के गायब होने के पीछे सबसे बड़ा नाम सेना प्रमुख आसिम मुनीर का है। दोनों के बीच दुश्मनी पुरानी है।
फैन से दुश्मन: आईएसआई डीजी पद से हटाना
एक ज़माने में मुनीर इमरान खान के फैन थे। 2018 में मुनीर को ISI का डीजी बनाया गया, लेकिन मात्र आठ महीने बाद ही इमरान खान ने उन्हें पद से हटा दिया। वजह थी कि मुनीर ने इमरान की पत्नी बुशरा बीबी के खिलाफ एक्शन लेने की तैयारी की थी।
मुनीर का उदय और इमरान पर 100 से अधिक मुक़दमे
2022 में इमरान की सरकार गिराने में मुनीर ने अहम भूमिका निभाई। इसके बाद 29 नवंबर 2022 को मुनीर आर्मी चीफ बन गए और तुरंत बाद इमरान पर अलकादिर ट्रस्ट, तोशाखाना, निकाह इद्दत जैसे 100 से अधिक मुकदमे चलाए गए, जिनमें कुल 30 साल से ज़्यादा की सज़ा सुनाई गई। यह स्पष्ट है कि इन मुकदमों का उद्देश्य इमरान को सार्वजनिक जीवन से हटाना था, और यह सब मुनीर के इशारे पर हुआ।
इमरान की अपनी आशंका: टेलीग्राफ में जान का खतरा
इमरान खान खुद अपनी मौत से पहले, 2 मई 2024 को ब्रिटेन के टेलीग्राफ में लेख छपवा चुके थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें या उनकी पत्नी को कुछ होता है, तो इसके ज़िम्मेदार सेना और आसिम मुनीर होंगे। आज मुनीर तीनों सेनाओं के अध्यक्ष हैं—यानी ‘पाकिस्तान का मतलब आसिम मुनीर’ हो गया है।
रिहाई असंभव: सेना बनाम जनता का भरोसा
पाकिस्तान में एक भी अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक यह नहीं मानता कि इमरान खान को जेल से रिहा किया जाएगा।
90% पाकिस्तान का चेहरा: इमरान की लोकप्रियता सेना के लिए खतरा
डिप्लोमेट की रिपोर्ट कहती है कि इमरान की रिहाई सिर्फ सेना से समझौते के बदले संभव है, और इमरान समझौता नहीं करेंगे। 2024 के चुनाव में पीटीआई को बैन करने के बावजूद, इमरान के समर्थकों ने 97 सीटें जीतीं, जो बताता है कि वह 90% पाकिस्तान का चेहरा हैं। जनता का यह भरोसा सेना और सरकार के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
जुल्फिकार भुट्टो से इमरान खान तक: सत्ता की क्रूरता का इतिहास
रावलपिंडी की जेल पत्थरों और दीवारों की नहीं, बल्कि पाकिस्तान में हमेशा से सत्ता की क्रूरता का प्रतीक रही है। जुल्फिकार भुट्टो को फांसी देने से लेकर इमरान खान के गायब होने तक, इतिहास खुद को दोहरा रहा है।
दुनिया से अपील: एक परमाणु शक्ति और सनकी जनरलों का खतरा
आज इमरान खान अफवाह की तरह हैं, जिसके सच या झूठ का जवाब सिर्फ उन्हीं के पास है जिनके हाथ में बंदूक है।
- दुनिया को समझना होगा: पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति है, और अगर यह देश “सनकी जनरलों” के हाथ में जाता है, तो दुनिया बर्बादी की ओर बढ़ सकती है।
- अंतिम मांग: अगर इमरान खान ज़िंदा हैं, तो उन्हें आजाद किया जाए। अगर नहीं हैं, तो सच बोला जाए। दुनिया को इमरान खान के लिए आवाज़ उठानी पड़ेगी।

